जै छठी माई
छठ सृष्टि के महापर्व हऽ, करऽ बनी किवइया
भक्ति भाव से नेह लगावऽ, पूरा करिहें मइया।
समरसता के परब बाबू ,ई समाज के जोड़ेला
ऊँच-नीच के भेद हटा के, सारा बंधन तोड़ेला
ना जाति के भेद बा कवनो, नाही धरम के बंधन
शरण में आवे ओकर मइया, करेली अभिनन्दन
भेद मिटा के मन से करऽ छठ के परब महान
मइया के आशीष से मिली, तोहके धन संतान
कार्तिक माह अजोरिया पावन छठ के पारब होला
शुद्ध भाव से अरघ देवेला, ले जालें सब डोला
चउठ नहाये खाये पंचमी खरना होत विधान
षष्ठी सप्तमी अर्घ्य के साथे, पूरा होत विधान
फल अउर पकवान से सजल दउरा खूब सोहाला
डूबत सुरूज के पाछे उगत सुरूज अरघ दियाला
पुरखन के पूजऽ पहिले, पाछे बा अउर समाज
जे पुरखन के पूजी ओकरा माथ सजी सब ताज
बनी किवइया करऽ बाबू, छठ के परब महान
इनके हीं आशीष से बढ़ी तोहर धन संतान
कहे बिजेन्दर जे भी छठ माई में नेह लगाई
सफल होई हर काम जगत में, सकल मनोरथ पाई
✍️बिजेन्द्र कुमार तिवारी (बिजेन्दर बाबू)
गैरतपुर, माँझी, सारण, बिहार मो. 7250299200
