भोजपुरी भगत भिखारी ठाकुर
भोजपुरी भगत भिखारी ठाकुर

भोजपुरी रोजाना
भोजपुरी माटी के गांव के गर्भ गृह से अवतरित गांव के हीरा गुदरी के लाल भिखारी ठाकुर के भोजपुरी नाटकन के शेक्सपीयर, रायबहादुर, समाज सुधारक, मलिक जी, कालजयी कलाकार का साथे-साथे तरह तरह के उपमा आ उपाधी से विभूषित कइल गइल बा। जेकरा नाम के माला भोजपुरी जगत में देश आ विदेश तकले भोजपुरिया समाज के जन मानस के आत्मा जाप कर रहल बा,जवना महान पुरूष के जन्म स्थान के तिरथ समझके लोग दुर-दुर से दर्शन करे खातिर आवत रहेला। ऊ युग-पुरूष भिखारी ठाकुर हमरा गाँव से सटले पूरूब आ उतर ईसान कोना पर बसल गाँव कुतुबपुर कोटवां पट्टी रामपुर के हमार जवारी पड़ोसिया हवन। भिखारी ठाकुर के नाम हमरा जिला जवार आ गांव के बुढ़ जवान बच्चा बच्चा के जुबाने पर वास करेला। इहा तकले कि हमार बाबा श्री रामेश्वर सिंह के नाम से खतिहानी जमीन लगभग चार बिगहा खेत धुसरीया मौजा में परेला! ऊ भिखारी ठाकुर के गांव के सिवान हऽ। आज भी भिखारी ठाकुर के गांव कुतुबपुर से घर परिवार के संबंध रहत आवत बा! इहाँ तकले कि बात बात में कवनो परतुत देबे के होला त भिखारी ठाकुर के गीत नाटकन के कुछ अंश से दे दीहल जाला। एगो कहाऊत अक्सरहाँ लोगन के मुँह से निकल जाला कि " दिन भर ऊखाड़ऽ खेसारी बीहने ले जईहें भिखारी "। एह क्षेत्र के लोग भिखारी के लिखल धुन गीत गवनई आ नाटक के करेजा के भीतर से आसीक आ दिवाना हऽ।
एगो जमाना रहे जब भिखारी ठाकुर के चलाना रहे उनका जवानी में जब उनकर नाच मंडली के नाच होखे के कहीं पता लागे त एहीजा के बुढ़ जवान लड़िका फड़िका कुल्ही लोगन के जमात नाच आ नाटक देखे खातिर टूट पड़त रहे। साँच पूछी त एह क्षेत्र में भिखारी ठाकुर नाच के पार्टी से ही मसहूर मानल आ जानल जालन। एगो बात इहो बा कि छपरहिया तान में जवन गीत खास करके पूरबी, निरगुण, सोहर, गावल जाला ओकर हिसाब किताब अलबते होला। एकर प्रधानता संगीत समाज में आज भी बरकरार बा। जब भिखारी ठाकुर के नाच मंडली के छपरीहा लवंडा स्टेज पर चढ़के पूरबी आऽ निरगुण के तान मारस लोग त ओह घरी के जमाना में बिना माइक के एक किलोमीटर तक सुनात रहे। काहें कि ऊ जमाना खाँटी घीव पीके गवनई करे वाला युग रहे। खांटी घीव खाय वाला कलाकारन के तान बिना माइक के एक किलोमीटर तक सुनाईल कवनो अचरज के बात ना रहे। भिखारी ठाकुर के साज बाज के जोड़ आज के दुनिया में खास करके भोजपुरी गायन आ वादन में त नाहीए लऊकत बा। भिखारी ठाकुर के सजवहीया लोग यानी कि पुरा म्युजिक मंडली साज बाज के साथे स्टेज पर जब लहरा बजावे लागे आ भिखारी ठाकुर आपन मलिकई ठाट में मंच पर विराजमान हो जात रहन! त ओह घरी के दृश्य के वर्णन हम कतना करिं! ई हमरा नइखे बुझात। लागत रहे कि माता सारदा साक्षात मंच पर विराजमान बाड़ी! खास बात ई रहे की भिखारी ठाकुर के मंच पर भिखारी ठाकुर के स्वरचित नाटक भजन आ गीत के ही मंचन होखत रहे। भिखारी ठाकुर के मुँह से निकलल संगीत साँचो के माई सरस्वती अपना हाथ से गढ़ के बनवले रही अइसनें बुझात रहे।
भिखारी ठाकुर नाटक लीला तमासा लिखे का साथे-साथे गवनइ गावे आ संगीत सजावे के भी महान एक्टर रहीं। भिखारी ठाकुर के ओढ़ावा-पहिरावा एकदम से सादा सुदी देहाती रहे। नीचे धोती ऊपर कुरता माथा पर बड़की मुरेठा गोड़ में पलास्टीक के जुता पेन्हत रहन। भिखारी ठाकुर जब मंच पर चढ़ के समाजी लोगन के साथे साज-बाज पर सम पर सम मिलाके ठाहाका लगावत रहन तऽ श्रोता लोग के बाह-बाह आ देहाती भाषा में चाबासी के आवाज केकरा मुंह से ना निकल जात रहे। जतना भीड़ आज काल्ह के ऑडियो-विडियो यूट्यूब के युग में लाख रूपया के थियेटर आरकेस्ट्रा में होखत बा एकरा से बेसी भीड़ अकेले भिखारी ठाकुर के तमासा नाटक आ नाच देखे खातिर होखत रहे। भिखारी ठाकुर के खास करके आरा जिला आ छपरा जिला के लोगन के द्वारा “मलिक" जी के उपाधी दीहल गइल रहे। ई उपाधी उनका जीवन काल में ही उनका स्वीकार रहे। आ ओहीजा के लोग उनका के "मलिक" जी के नाम से ही आदर के साथ बोलावत आ सम्बोधित भी करत रहे। तबे नू भिखारी ठाकुर के मुअला का बाद ई गीत सब कलाकार लोग के द्वारा गावाए लागल " सन उनईस सौ एकहतर के सवानवा मलिक जी हो गइलन सपनवा " जेकर रहे खास कुतुबपुर मकानवा। ई बात एकदम साँच ह कि भिखारी ठाकुर 'गुदरी के लाल" रहन। उनकर प्रतिभाशाली व्यक्तित्व लरिकाईंए से चम चमात रहें। भिखारी ठाकुर के जन्म 18-12-1887 पूस सुदी,पंचमी तिथि, दिन सोमवार समय 12 बजे दिन घनिष्ठा नक्षतर के दोसरका चरण मे ओह घरी के जिला शाहाबाद, (भोजपुर ) के गाँव शंकरपुर महाल दियर, थाना बड़हरा, बिहार प्रदेश में भइल रहे। बाकिर ओकरा कुछ दिन का बाद ही गंगाजी के कटाव आ बाढ़ क्षेत्र होखला के कारण ऊ गाँव ढ़हे के कगार पर पहुँच गइल। ओही घरी भिखारी ठाकुर के पूरा परिवार आ ओहीजा के अवरू लोग कुछही कोस के दुरी पर उतर दिशा के तरफ जिला भोजपुर आ सारण के बाडर पर जाके गाँव- कुतुबपुर पोस्ट-कोटवाँपट्टी रामपुर जिला-सारण (छपरा) बिहार में स्थायी रूप से बस गईल। एह बात से जानल जाव कि अइसे में भिखारी ठाकुर के जन्म भोजपुर जिला के माटी पर ही भइल रहे। भिखारी ठाकुर के माई के नाम शिवकली देवी आ पिताजी के नाम दलसिंगार ठाकुर रहे। भिखारी ठाकुर के पत्नी के नाम मतुरना देवी रहे। उनका बेटा के नाम शिलानाथ ठाकुर रहे। उनकर प्रमुख नाटक के नाम हउए बिदेसिया,भाई-विरोध, बेटी-वियोग, कलियुग-प्रेम, राधेश्याम बहार, गंगास्नान, विधवा विलाप, पुत्रवध, गबर-घिचोर, ननद भऊजाई, बिरहा- बहार। उनकर भजन कीर्तन के नाम हउए भिखारी भजन माला, भिखारी हरिकीर्तन, भिखारी चौजुगी पावन, माता भक्ति, देव कीर्तन, नाम रतन परिचय, भिखारी यशोदा संवाद, रामनाम माला। उनकर अन्य कीर्ति- नाई बहार,जय हिन्द खबर,भिखारी संका समाधान ह। अइसन-अइसन नाटक, भजन माला आ बहुमूल्य किरितयन के देखला के बाद जरूरे महसूस होखत बा कि भिखारी ठाकुर चर्चित बहुआयामी चरित्र वाला व्यक्तित्व के संगे महान नाटककार गीतकार, साहित्यकार, कवि,निर्देशक, कलाकार, संजीतज्ञ, समाज सुधारक भविष्य जाने वाला एगो सतयुगीया दूरदरसी ज्योतिषि भी रहीं। सुप्रसिद्ध विद्वान राहुल सांकृत्यायनभिखारी ठाकुर के भोजपुरी के शेक्सपीयर के नाम से नावाजीए देले बाड़न। साथ में “अनगढ़ हीरा" भी कहले बानी। एह उपाधी आ बात से साफ साबित हो जात बा कि भिखारी ठाकुर मानव के रूप में साक्षात ईश्वर के दीहल प्रसाद रहीं! जेकरा के पा के भोजपुरी जगत धन्य-धन्य हो गइल। ढेर लोग के मन में ई बात भी आवेला कि अतहत महान आत्मा नाच मंडली के गठन करे का ओर काहें मुखातीब भइलन,ओकरा पर भी दू शब्द कलम से जरूर सवाँरल चाहब। भिखारी ठाकुर जयंती के अवसर पर जब भिखारी ठाकुर के गाँव में हम उनकर जीवन चरित्र के साथे-साथे उनकर घर दुआर आ किरती के जानकारी लेबे खातिर कुतुबपुर गाँव पहुँचलीं त ओह गांव के बुढ़ पुरनीया उनकर गोतिया पड़ोसिया महीला पुरुष लोगन से मुलाकात भइल। ओही भ्रमण के दौरान भिखारी ठाकुर के जीवन चरित्र के खोज करत उनका घर-दुआर के निरेखनी। जवन मकान भिखारी ठाकुर के जीवन काल में माटी,फूस के खपड़ैल रहे ऊ आज भी अपना तनिआसा परिवर्तनशील अवस्था में जेंव के तेंव देखे के मिलल। भिखारी ठाकुर के पुस्तैनी मकान के देवाल ईटा खपड़ैलनुमा दूआर के छावल ओसारा के कसहूँ-कसहूँ सरकार इन्दिरा आवास से एगो रूम (घर) बनवा के आपन चाबासी लूटत बिया। ई सब चीज भिखारी ठाकुर के जीवन चरित्र खोजे के क्रम में हमरा सचित्र देखे के आ सुने के मिलल। अब ओकर जिकीर हम करत बानी ध्यान देबे के जरुरत बा! भिखारी ठाकुर के जन्म हजाम (नाई) परिवार में जरूर भइल रहे। बाकिर जन्म के बाद उनका में कुछ समझदारी आ गइल रहे। उनका हजामत बनावे आ गृहस्थी का साथे-साथे संगीत से बड़ा लगाव रहत रहे। प्रभावशाली चरित्र आ चौमुखी साहित्यवादी दृष्टि के धनी ऊ लरिकाईए से रहन। जवानी अवस्था में घूमें का ख्याल से भिखारी ठाकुर खड़गपुर के मेदनीपुर जिला पहुँचलन। संयोग से ओहीजा रामलीला आ रासलीला के प्रोग्राम होखत रहे। जवन कुछ दिन तक चलल। ओहीजा रहके भिखारी ठाकुर पूरा रामलीला रासलीला के देखलन आ आनंद उठवलन। भगवान के लीला, पूरा श्री रामचरित्र मानस आ कृष्णलीला देखला के बाद सीधा अपना गाँव पर लवटलन जहँवा आके अपना गाँव जवार में ओह रामलीला आ रासलीला के वर्णन अपना श्रीमुख से करे लगलन। एकरा साथे-साथे उनका मन में एगो बात टीस लेखा मारत रहे कि हमहूँ काहें ना एगो रामलीला के पार्टी बनाई । बस कुछे दिन के बाद जवार मे घूम-घूम के बढ़िया कलाकार लोगन के खोजे लगनी। ओही क्रम में कुछ वादक लोग आ गायक लोगन के खोजलन, कुछ नाच करे वाला लवंडन के तैयार कइलन आ एगो रामलीला, रासलीला के पार्टी तैयार कइलन। साथे-साथे भिखारी ठाकुर सबसे पहिले आपन लिखल रासलीला के प्रदर्शन गाँवे गाँवे घूम-घूम के करे लगलन। ऊ रासलीला पार्टी धीरे-धीरे नाच आ तमासा पार्टी के रूप में भी प्रचलित होखे लागल। कारण कि भिखारी ठाकुर के लिखल नाटक तमासा, छपरहिया पूर्वी निर्गुण सोहर किसीम -किसीम के धुन राग साच मंडली के द्वारा गवाए लागल।
भिखारी ठाकुर के खास बात ई रहे कि गीत का संगे-संगे आपन धुन भी बनवलन। जवन गीत आ धुन गाँव के लोग बड़ा चाव से सुने आ भिखारी ठाकुर के नाच मंडली के देखे खातिर लालायित होखे लागल। गते-गते भिखारी ठाकुर के नाच मंडली के हाला गाँव जवार जिलन के गली तक सुनाए लागल भिखारी के लय खेत बधार खलिहान तकले गुंजे लागल। लगन के दिन में साटा लिखाए लागल आ रूपया भी आवे लागल। एह बात के जिकिर गीत में भी गावल जाला भोजपुरी में मलिक जी महानवा ए लोगे जानता जहानवा ना, गइले मेदनीपुर के जिला ओहीजे देखले रामलीला आके नाचवा के कदेलन रचनवा ए लोगे जानता जहानवा ना। अब अइसन हो गइल रहे कि भिखारी ठाकुर के नाँव गते-गते पूरा बिहार आ उत्तरप्रदेश के कोना में समाये लागल। एडभांस रूपया मिले लागल। महंगा-महंगा साटा लिखाए लागल। जइसे-जइसे भिखारी ठाकुर के उमिर पुरान होत जाए उनकर नाम आ किरती दिनो दिन करमी का लतर लेखा फैलल जात रहे। अब हाल अइसन हो गइल रहे कि भिखारी के लोकप्रियता का चलते जहाँ-जहाँ उनकर नाच के मंडली जाए, ओहीजा-ओहीजा भिखारी ठाकुर के लोग (डोली) असवारी में बइठा के देखे खातिर ले जात रहे।
एक दिन भिखारी ठाकुर बुढ़ापा अवस्था में दिनांक-10 जुलाई 1971 के 84 बरिस के उमिर में गाँव कुतुबपुर में ही मृत्यु के गले लाग गइलन। हमनी के भारतीय संस्कृति में जिन्दा आदमी से बेसी मुअला पर इयाद कइल जाला आ सम्मान से नवाजल जाला। अइसन कइगो प्रमाण बा! जीवित अवस्था में हीरा के पहचान ना कके मुअला पर गौरव गाथा गावल जाला। जवना बात के हम विरोध करत बानी? आज भिखारी ठाकुर के कृति दिया आ बल्ब बार के गांवन के गलीयन में खोजा रहल बा। उनका फोटो के पूजा हो रहल बा। कतना लोग उनका नाम पर चंदा काटके राजनीति के रोटी सेक रहल बा। उनका नाम के जयकारी गूंज रहल बा। भिखारी ठाकुर एह बात के जिकिर अपना जिनिगी में कईयो देले रहन। "अबही नाम भइल बा थोर जब ई तन छुटि जाई मोर"। तेकरा बाद नाम होइ जइहन पंडित कवि सज्जन जस गइहन नइखी पाठ पढ़ल ए भाई गलती बहुत लऊकते जाई आज ओही भिखारी के जीवन आ चरित्र के बारे में लोगन के भिन्न-भिन्न मत बा। कहे खातिर त कतना नेता, कतना ऑफिसर, भोजपुरी आ भिखारी ठाकुर के प्रति श्रद्धा भक्ति मंच पर माइक में बोल-बोल के करेजा जुड़वा के चली गइलन! बाकिरओहिजा से गईला के बाद फेर लवट के इहो ना देखलन आ महसूस कइल लोग कि भोजपुरी भाषा भी कवनो चीज ह। मालुम होखो कि भिखारी ठाकुर लोक साहित्य आ संस्कृति महोत्सव 2002 के शुभ अवसर पर तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री लालु प्रसाद यादव के भिखारी ठाकुर महोत्सव समिति का तरफ से भोजपुरी सपूत, सम्मान से सम्मानित कइल गइल रहे। जवना में पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी जय प्रकाश नारायण यादव, साँसद रामकृपाल यादव का संगे-संगे कतना राजद के नामी गिरामी राजनेता लोग भी भाग लेले रहन। बाकिर ऊ अईसन सपूत कवना काम के जे अपना मतारी भासा के शेक्सपीयर, समाज सुधारक,जनकवि, भोजपुरी के पहचान, शान,आ स्वाभिमान भिखारी ठाकुर के घर के जीर्णोद्धार ना करा सकले ? ऊ सपूत कवना काम के जे आज तक सांसद भा विधान सभा में भोजपुरी खातिर ना कवनो माँग रख सकले। आ ना एह भासा के संविधान के आठवी सूची में शामिल करे खातिर कवनो प्रयत्न कर सकले।
हाय रे ऊ सपूत जे जनता के माँग रहे कि भिखारी ठाकुर के नाम पर आरा से छपरा के बीच एगो रेलवे सड़क लाईन गंगा सरयु नदी पर पुल के विस्तार कइल जाव ओकरा पर भी चुप्पी साध के हाथ पर हाथ धई के बइठ गइलन! जबकि खुद लालु प्रसाद यादव भिखारी ठाकुर सपुत सम्मान मिलला के बाद रेल मंत्री भी रह चुकल बाड़े। ओही मंत्रालय के ई काम भी रहे! बाकिर एह काम के उनका ना कवनो चिन्ता रहल आ ना कवनो पाई भर फिकिर रहल! का ऊ ओह दिन के भासनबाजी के भूला गईलें का? जवना दिन हेल्लीकॉप्टर उड़ाके कुतुबपुर गाँव में जाके भोजपुरी खातिर लमहर-लमहर आश्वासन के पुल बान्ह के आइल रहन ? मिला-जुला के देखल जाव त राजनीतिक कमजोरी के चलते ही आज तक भिखारी ठाकुर जइसन साहित्यकार, नाटककार, शेक्सपियर के साथे-साथे करोड़न भोजपुरिया लोगन के मतारी भाषा भोजपुरी उपेक्षित परल बा।
✍️कुमार अजय सिंह
गीतकार / कहानीकार
ग्राम+पोस्ट : एकवना घाट
बड़हरा, भोजपुर आरा, बिहार 802311
9934483155
